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वाल्मीकि रामायण 13.40

आशया तौ धरिष्येते वनराः च मनस्विनः ।
हस्त आदानो मुख आदानो नियतो वृक्ष मूलिकः ॥५-१३-४०॥

पूरा अध्याय