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वाल्मीकि रामायण 10.8

लोहितेन अनुलिप्त अन्गम् चन्दनेन सुगन्धिना ।
सम्ध्या रक्तम् इव आकाशे तोयदम् सतडिद् गुणम् ॥५-१०-८॥

पूरा अध्याय