ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1010.7वाल्मीकि रामायण 10.7तस्मिन् जीमूत सम्काशम् प्रदीप्त उत्तम कुण्डलम् । लोहित अक्षम् महा बाहुम् महा रजत वाससम् ॥५-१०-७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय