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वाल्मीकि रामायण 10.9

वृतम् आभरणैर् दिव्यैः सुरूपम् काम रूपिणम् ।
सव्र्क्ष वन गुल्म आढ्यम् प्रसुप्तम् इव मन्दरम् ॥५-१०-९॥

पूरा अध्याय