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वाल्मीकि रामायण 10.47

पाणिभ्याम् च कुचौ काचित् सुवर्ण कलश उपमौ ।
उपगूह्य अबला सुप्ता निद्रा बल पराजिता ॥५-१०-४७॥

पूरा अध्याय