ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1010.46वाल्मीकि रामायण 10.46कलशीम् अपविद्ध्य अन्या प्रसुप्ता भाति भामिनी । वसन्ते पुष्प शबला माला इव परिमार्जिता ॥५-१०-४६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय