ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1010.45वाल्मीकि रामायण 10.45काचिद् आडम्बरम् नारी भुज सम्भोग पीडितम् । कृत्वा कमल पत्र अक्षी प्रसुप्ता मद मोहिता ॥५-१०-४५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय