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वाल्मीकि रामायण 10.44

डिण्डिमम् परिग्र्ह्य अन्या तथैव आसक्त डिण्डिमा ।
प्रसुप्ता तरुणम् वत्सम् उपगूह्य इव भामिनी ॥५-१०-४४॥

पूरा अध्याय