ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1010.42वाल्मीकि रामायण 10.42अन्या कनक सम्काशैर् म्र्दु पीनैर् मनो रमैः । मृदन्गम् परिपीड्य अन्गैः प्रसुप्ता मत्त लोचना ॥५-१०-४२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय