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वाल्मीकि रामायण 10.41

विपञ्चैइम् परिगृह्यान्या नियता नृत्तशालिनी ।
निद्रा वशम् अनुप्राप्ता सह कान्ता इव भामिनी ॥५-१०-४१॥

पूरा अध्याय