ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1010.40वाल्मीकि रामायण 10.40काचिद् अम्शम् परिष्वज्य सुप्ता कमल लोचना । रहः प्रियतमम् गृह्य सकामेव च कामिनी ॥५-१०-४०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय