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वाल्मीकि रामायण 10.39

पटहम् चारु सर्व अन्गी पीड्य शेते शुभ स्तनी ।
चिरस्य रमणम् लब्ध्वा परिष्वज्य इव कामिनी ॥५-१०-३९॥

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