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वाल्मीकि रामायण 10.38

अन्या कक्ष गतेन एव मड्डुकेन असित ईक्षणा ।
प्रसुप्ता भामिनी भाति बाल पुत्रा इव वत्सला ॥५-१०-३८॥

पूरा अध्याय