ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1010.37वाल्मीकि रामायण 10.37काचिद् वीणाम् परिष्वज्य प्रसुप्ता सम्प्रकाशते । महा नदी प्रकीर्णा इव नलिनी पोतम् आश्रिता ॥५-१०-३७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय