ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1010.27वाल्मीकि रामायण 10.27पाण्डुरेण अपविद्धेन क्षौमेण क्षतज ईक्षणम् । महा अर्हेण सुसम्वीतम् पीतेन उत्तम वाससा ॥५-१०-२७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय