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वाल्मीकि रामायण 1.158

तं प्रयान्तं समुद्वीक्ष्य सुरसा वाक्यमब्रवीत् ।
बलं जिज्ञासमाना वै नागमाता हनूमतः ॥५-१-१५८॥

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