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वाल्मीकि रामायण 1.157

एवमुक्ता हनुमता सुरसा कामरूपिणी ।
अब्रवीन्नातिवर्तेत कश्चिदेष वरो मम ॥५-१-१५७॥

पूरा अध्याय