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वाल्मीकि रामायण 1.159

प्रविश्य वदनं मेऽद्य गन्तव्यं वानरोत्तम ।
वर एष पुरा दत्तो मम धात्रेति सत्वरा ॥५-१-१५९॥

पूरा अध्याय