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वाल्मीकि रामायण 1.134

स पर्वतसमुद्राभ्यां बहुमानादवेक्षितः ।
पूजितश्चोपपन्नाभिराशीर्भिरनिलात्मजः ॥५-१-१३४॥

पूरा अध्याय