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वाल्मीकि रामायण 1.133

इत्युक्त्वा पाणिना शैलमालभ्य हरिपुङ्गवः ।
जगामाकाशमाविश्य वीर्यवान् प्रहसन्निव ॥५-१-१३३॥

पूरा अध्याय