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वाल्मीकि रामायण 67.43

बाहुभ्याम् पीडितः तेन महाशैलो महात्मना ।
ररास सिंह अभिहतो महान् मत्त इव द्विपः ॥४-६७-४३॥

पूरा अध्याय