ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 6767.42वाल्मीकि रामायण 67.42महद्भिः उच्छ्रितम् शृन्गैः महेन्द्रम् स महाबलः । विचचार हरिश्रेष्ठो महेन्द्र साम विक्रमः ॥४-६७-४२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय