Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 67.44

मुमोच सलिल उत्पीडान् विप्रकीर्ण शिलोउच्चयः ।
वित्रस्त मृग मातंगः प्रकंपित महा द्रुमः ॥४-६७-४४॥

पूरा अध्याय