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वाल्मीकि रामायण 59.13

तत्र सत्त्व सहस्राणाम् सागर अन्तर चारिणाम् ।
पंथानम् एको अध्यवसम् संनिरोद्धुम् अवाङ् मुखः ॥४-५९-१३॥

पूरा अध्याय