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वाल्मीकि रामायण 5.14

काष्ठयोः स्वेन रूपेण जनयामास पावकम् ।
दीप्यमानम् ततो वह्निम् पुष्पैः अभ्यर्च्य सत्कृतम् ॥४-५-१४॥

पूरा अध्याय