ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 4343.22वाल्मीकि रामायण 43.22विशाला नलिनी यत्र प्रभूत कमलोत्पला । हंस कारण्डव आकीर्णा अप्सरो गण सेविता ॥४-४३-२२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय