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वाल्मीकि रामायण 43.23

तत्र वैश्रवणो राजा सर्व भूत नमस्कृतः ।
धनदो रमते श्रीमान् गुह्यकैः सह यक्ष राट् ॥४-४३-२३॥

पूरा अध्याय