Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 43.20

तत् तु शीघ्रम् अतिक्रम्य कांतारम् रोम हर्षणम् ।
कैलासम् पाण्डुरम् प्राप्य हृष्टा यूयम् भविष्यथ ॥४-४३-२०॥

पूरा अध्याय