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वाल्मीकि रामायण 41.36

शरणम् कांचनम् दिव्यम् नाना रत्न विभूषितम् ।
तत्र भोगवती नाम सर्पाणाम् आलयः पुरी ॥४-४१-३६॥

पूरा अध्याय