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वाल्मीकि रामायण 41.37

विशाल रथ्या दुर्धर्षा सर्वतः परिरक्षिता ।
रक्षिता पन्नगैः घोरैः तीष्क्ण दम्ष्ट्रैः महा विषैः ॥४-४१-३७॥

पूरा अध्याय