Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 41.35

अगस्त्य भवनम् यत्र निर्मितम् विश्वकर्मणा ।
तत्र योजन विस्तारम् उच्छ्रितम् दश योजनम् ॥४-४१-३५॥

पूरा अध्याय