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वाल्मीकि रामायण 41.34

मधूनि पीत्वा जुष्टानि परम् गच्छत वानराः ।
तत्र नेत्र मनः कांतः कुंजरो नाम पर्वतः ॥४-४१-३४॥

पूरा अध्याय