ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 3333.65वाल्मीकि रामायण 33.65दिव्य आभरण माल्याभिः प्रमदाभिः समावृतम् । संरब्धतर रक्ताक्षो बभूव अंतक संनिभः ॥४-३३-६५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय