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वाल्मीकि रामायण 33.66

रुमाम् तु वीरः परिरभ्य गाढम्वर आसनस्थो वर हेम वर्णः ।
ददर्श सौमित्रिम् अदीन सत्त्वम्विशाल नेत्रः स विशाल नेत्रम् ॥४-३३-६६॥

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