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वाल्मीकि रामायण 33.64

दिव्य आभरण चित्रांगम् दिव्य रूपम् यशस्विनम् ।
दिव्य माल्यांबर धरम् महेन्द्रम् इव दुर्जयम् ॥४-३३-६४॥

पूरा अध्याय