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वाल्मीकि रामायण 30.37

शरत् गुण आप्यायित रूप शोभाःप्रहर्षित पांशु समुक्षित अंगाः ।
मद उत्कटाः संप्रति युद्ध लुब्धावृषा गवाम् मध्य गता नदन्ति ॥४-३०-३७॥

पूरा अध्याय