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वाल्मीकि रामायण 30.36

सूर्य आतप क्रामण नष्ट पंकाभूमिः चिर उद्घाटित सांद्र रेणुः ।
अन्योन्य वैरेण समायुतानाम्उद्योग कालो अद्य नर अधिपानाम् ॥४-३०-३६॥

पूरा अध्याय