ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 2828.6वाल्मीकि रामायण 28.6मन्द मारुत निःश्वासम् संध्या चंदन रंजितम् । आपाण्डु जलदम् भाति काम आतुरम् इव अंबरम् ॥४-२८-६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय