Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 28.7

एषा घर्म परिक्लिष्टा नव वारि परिप्लुता ।
सीता इव शोक संतप्ता मही बाष्पम् विमुंचति ॥४-२८-७॥

पूरा अध्याय