वाल्मीकि रामायण 28.35
मुक्ता समाभम् सलिलम् पतत् वैसुनिर्मलम् पत्र पुटेषु लग्नम् ।
हृष्टा विवर्ण च्छदना विहंगाःसुरेन्द्र दत्तम् तृषिताः पिबन्ति ॥४-२८-३५॥
मुक्ता समाभम् सलिलम् पतत् वैसुनिर्मलम् पत्र पुटेषु लग्नम् ।
हृष्टा विवर्ण च्छदना विहंगाःसुरेन्द्र दत्तम् तृषिताः पिबन्ति ॥४-२८-३५॥