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वाल्मीकि रामायण 28.36

षत्पद तंत्री मधुर अभिधानम्प्लवंगम् उदीरित कण्ठ तालम् ।
आविष्कृतम् मेघ मृदंग नादैःवनेषु संगीतम् इव प्रवृत्तम् ॥४-२८-३६॥

पूरा अध्याय