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वाल्मीकि रामायण 28.34

कदंब सर्जा अर्जुन कंदल आढ्यावनान्त भूमि मधु वारि पूर्णा ।
मयूर मत्ता अभिरुत प्रवृत्तैःअपान भूमि प्रतिमा विभाति ॥४-२८-३४॥

पूरा अध्याय