वाल्मीकि रामायण 28.20
विद्युत् पताकाः स बलाक मालाःशैलेन्द्र कूट आकृति संनिकाशाः ।
गर्जन्ति मेघाः समुदीर्ण नादामत्त गजेन्द्रा इव संयुगस्थाः ॥४-२८-२०॥
विद्युत् पताकाः स बलाक मालाःशैलेन्द्र कूट आकृति संनिकाशाः ।
गर्जन्ति मेघाः समुदीर्ण नादामत्त गजेन्द्रा इव संयुगस्थाः ॥४-२८-२०॥