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वाल्मीकि रामायण 28.19

रस आकुलम् षट्पद संनिकाशम्प्रभुज्यते जंबु फलम् प्रकामम् ।
अनेक वर्णम् पवन अवधूतम्भूमौ पतति आम्र फलम् विपक्वम् ॥४-२८-१९॥

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