ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 2020.2वाल्मीकि रामायण 20.2सा समासाद्य भर्तारम् पर्यष्वजत भामिनी । इषुणा अभिहतम् दृष्ट्वा वालिनम् कुंजरोपमम् ॥४-२०-२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय