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वाल्मीकि रामायण 20.3

वानरम् पर्वत इन्द्र आभम् शोक संतप्त मानसा ।
तारा तरुम् इव उन्मूलम् पर्यदेवयत् आतुरा ॥४-२०-३॥

पूरा अध्याय