ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 1717.10वाल्मीकि रामायण 17.10आदित्यम् इव कालेन युगान्ते भुवि पातितम् । महेन्द्रम् इव दुर्धर्षम् उपेन्द्रम् इव दुस्सहम् ॥४-१७-१०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय