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वाल्मीकि रामायण 17.9

तम् तथा पतितम् संख्ये गत अर्चिषम् इव अनलम् ।
ययातिम् इव पुण्यान्ते देव लोकात् परिच्युतम् ॥४-१७-९॥

पूरा अध्याय