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वाल्मीकि रामायण 17.11

महेन्द्र पुत्रम् पतितम् वालिनम् हेम मालिनम् ।
व्यूढ उरस्कम् महाबाहुम् दीप्तास्यम् हरि लोचनम् ॥४-१७-११॥

पूरा अध्याय