ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 1616.25वाल्मीकि रामायण 16.25तौ भीम बल विक्रान्तौ सुपर्ण सम वेगिनौ । प्रयुद्धौ घोर वपुषौ चन्द्र सूर्यौ इव अंबरे ॥४-१६-२५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय